हिन्दी उपन्यास का विकास

हिन्दी उपन्यास का विकास – Mossberg


हिन्दी उपन्यास का विकास

प्रेमचन्द्र पूर्व (प्रथम उत्थान)

हिन्दी में ‘नावेल’ के अर्थ में ‘उपन्यास’ शब्द का प्रथम प्रयोग भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने 1875 ई. में ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ में प्रकाशित अपने अपूर्ण रचना ‘मालती’ के लिए किया था।ब्रजरत्न दास के अनुसार, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने ‘कुछ आपबीती कुछ जग बीती’ नाम से एक उपन्यास लिखा था।हिन्दी का प्रथम उपन्यास, उपन्यासकार एवं प्रस्तोता-

प्रस्तोताउपन्यासकारउपन्यासवर्ष
डॉ. गोपाल रायपं. गौरी दत्तदेवरानी जेठानी की कहानी1870 ई.
डॉ विजयशंकर मल्लश्रद्धाराम फिल्लौरीभाग्यवती1877 ई.
श्री रामचन्द्र शुक्लश्रीनिवासदासपरीक्षा-गुरु1882 ई.

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लाला श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरु’ को अंग्रेजी के ढंग का हिन्दी का पहला मौलिक उपन्यास माना है।प्रेमचंद्र पूर्व उपदेश प्रधान सामाजिक उपन्यास निम्न हैं-

उपन्यासकारउपन्यास
गौरीदत्तदेवरानी जेठानी की कहानी (1870)
ईश्वरी प्रसाद व कल्याण रायवामा शिक्षक (1872)
श्रद्धाराम फिल्लौरीभाग्यवती (1877)
लाला श्रीनिवासदासपरीक्षा गुरु (1882)
बालकृष्ण भट्ट1. नूतन ब्रह्मचारी (1886), 2. रहस्य कथा (1879), 3. सौ अजान एक सुजान (1892)
राधाकृष्ण दासनिस्सहाय हिन्दू (1890)
ठाकुर जगमोहन सिंहश्यामा स्वप्न (1888)
लज्जाराम मेहता1. धूर्त रसिक लाल (1889), 2. स्वतंत्र रमा और परतंत्र लक्ष्मी (1899), 3. आदर्श दम्पति(1904), 4. बिगड़े का सुधार अथवा सती सुख देवी (1907), 5. आदर्श हिन्दू (1914)
किशोरीलाल गोस्वामी1. लवंगलता वा आदर्शबाला (1890), 2. स्वर्गीय कुसुम वा कुसुम कुमारी (1889), 3. लीलावती वा आदर्शसती (1901), 4. चपला वा नव्य समाज (1903), 5. तरुण तपस्विनी वा कुटीर वासिनी (1906), 6. पुनर्जन्म वा सौतिया डाह (1907), 7. माधवी माधव वा मदनमोहिनी (1909), 8. अँगूठी का नगीना (1918)।
अयोध्या सिंह उपाध्याय1. अधखिला फूल (1907), 2. ठेठ हिन्दी का ठाठ (1899)
ब्रजनन्दन सहाय1. सौन्दर्योपासक (1912), 2. राधाकांत (1918)
मन्नन द्विवेदीरामलाल(1917)
राधिकारमण प्रसाद सिंहवनजीवन वा प्रेमलहरी (1916)

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध कृत ‘ठेठ हिन्दी का ठाठ’ उपन्यास को ‘मुहावरों का पाठ्य-पुस्तक’ कहा जाता हैं?राधाकृष्णदास कृत ‘निस्सहाय हिन्दू’ हिन्दी का पहला उपन्यास है जिसमें मुस्लिम समाज का अंकन किया गया है। यह गोवध-निवारण के लिए लिखा गया था।किशोरीलाल गोस्वामी का ‘स्वर्गीय कुसुम वा कुसुम कुमारी’ (1889 ई.) वेश्या जीवन पर आधारित हिंदी का प्रथम उपन्यास हैं।किशोरीलाल गोस्वामी को हिन्दी का प्रथम ऐतिहासिक उपन्यासकार माना जाता है।डॉ. गोपाल राय पं. बालकृष्ण भट्ट को हिन्दी का प्रथम ऐतिहासिक उपन्यासकार मानते हैं।प्रेमचन्द्र पूर्व हिन्दी के प्रमुख ऐतिहासिक उपन्यासकार-

उपन्यासकारउपन्यास
किशोरीलाल गोस्वामी1. हृदयहारिणी वा आदर्श रमणी (1890), 2. तारा (1902), 3. राजकुमारी (1902), 4. कनक कुसुम वा मस्तानी (1903), 5. लखनऊ की कब्र वा शाही महलसरा। (1918), 6. सुल्ताना रजिया बेगम वा रंग महल में हलाहल (1905)।
गंगा प्रसाद गुप्त1. पृथ्वीराज चौहान (1902), 2. कुँवर सिंह सेनापति (1903), 3. हम्मीर (1904)
जयरामदास गुप्त1. कश्मीर पतन (1907), 2. मायारानी (1908), 3. नवाबी परिस्तान वा वाजिद अली शाह (1908), 4. कलावती (1909)
रामनरेश त्रिपाठीवीरांगना (1911)
मथुरा प्रसाद शर्मानूरजहाँ बेगम व जहाँगीर (1905)
ब्रजनन्दन सहायलालचीन (1916)
मिश्र बन्धुवीरमणि (1917)
श्यामसुन्दर वैद्यपंजाब पतन
कृष्ण प्रसाद सिंहवीर चूड़ामणि

‘निस्सहाय हिन्दू’ हिन्दी प्रथम पूर्ण उपन्यास है जिसमें नाटकीय पद्धति पर प्रसंगों के निर्माण तथा कथाओं के युगपत संक्रमण की प्रविधि अपनाई गई है।देवकीनन्दन खत्री को हिन्दी में तिलस्मी-ऐयारी उपन्यासों का प्रर्वतक माना जाता है।देवकीनन्दन खत्री के प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैं-

चंद्रकांता (1888), चंद्रकांता संतति (24 भाग-1996) (1896), नरेन्द्र मोहिनी (1893), वीरेन्द्र वीर (1895), कुसुम कुमारी (1899), काजर की कोठरी (1902), अनूठी बेगम (1905), गुप्त गोदना (1913), भूतनाथ (6 भाग-अधूरा 1907)।देवकीनंदन खत्री के पुत्र दुर्गाप्रसाद खत्री ने अपने पिता कृत ‘भूतनाथ’ के शेष भाग पूरे किये।गोपालराम गहमरी को हिन्दी में जासूसी उपन्यासों का प्रवर्तक माना जाता हैं।गोपाल राम गहमरी के प्रमुख उपन्यास हैं- ‘अद्भुत लाश’, ‘बेकसूर की फाँसी’, ‘सरकारी लाश’, ‘खूनी कौन’, ‘बेगुनाह का खून’, ‘जासूस की भूल’, ‘अद्भुत खून’ आदि।गोपालराम गहमरी को हिन्दी का ‘कानन डायल’ कहा गया है।प्रेमचन्द्र पूर्व हिन्दी के अन्य महत्त्वपूर्ण औपन्यासिक रचनाएँ-

उपन्यासकारउपन्यास
भुवनेश्वर मिश्र1. घराऊ घाट (1894), 2. बलवंत भूमिहार (1896)
राधाचरण गोस्वामीसौदामिनी (1891)
कुँवर हनुमंत सिंहचन्द्रकला (1893)
जैनेन्द्र किशोरगुलेनार (1907)
गंगा प्रसाद गुप्तलक्ष्मी देवी (1910)
अवधनारायणविमाता (1916)
ब्रजनन्दन सहाय1. राजेन्द्र मालती (1897), 2. अद्भुत प्रायश्चित (1901), 3. अरण्यबाला (1915)

कुंवर हनुमंत सिंह कृत ‘चन्द्रकला’ (1893) हिन्दी का प्रथम उपन्यास है जिसमें स्त्रियों के बलात शोषण का अंकन किया गया है।पं. बालकृष्ण भट्ट कृत ‘सौ अजान एक सुजान'(1892) हिन्दी का प्रथम चरित्र प्रधान उपन्यास हैं।

हिन्दी उपन्यास का विकास

द्वितीय उत्थान : प्रेमचन्द्र युग

मुंशी प्रेमचन्द्र (1880-1936 ई.) का मूलनाम धनपत राय था। किन्तु वे नाम बदलकर ‘नवाब राय’ बनारसी के नाम से लिखते थे।धनपतराय को ‘प्रेमचन्द्र’ नाम उर्दू के लेखक दयानारायण निगम ने दिया था।प्रेमचन्द्र को ‘उपन्यास-सम्राट’ की संज्ञा बंगला कथाकार शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ने दिया था।प्रेमचन्द्र द्वारा लिखे मूल उर्दू में उपन्यास का उनके द्वारा किया गया हिन्दी रूपान्तर निम्नलिखित हैं-

मूल उर्दू उपन्यासवर्षहिन्दी रूपान्तरवर्ष
असरारे मआविद1903-1905देवस्थान रहस्य1905
हमखुर्मा व हमसवाब1906प्रेमा अर्थात दो सखियों का विवाह1907
किशना1907गबन1931
जलवाए ईसार1912वरदान1921
बाजारे हुस्न1917सेवासदन1918
गोशाएँ आफियतप्रेमाश्रयगोशाएँ आफियत1922
चौगाने हस्तीरंगभूमि1925

‘असरारे मआविद’ प्रेमचन्द्र का प्रथम उपन्यास है।’सेवा सदन’ प्रेमचन्द्र का पहला प्रौढ़ हिन्दी उपन्यास है।प्रेमचन्द्र का हिन्दी में मूल रूप से लिखा प्रथम उपन्यास ‘कायाकल्प’ (1926) है।सन् 1907 ई. में प्रेमचन्द्र ने ‘रूठी रानी’ नामक ऐतिहासिक उपन्यास की रचना की।प्रेमचन्द्र के हिन्दी उपन्यास रचना क्रम के अनुसार निम्नांकित हैं-

देवस्थान रहस्य (1905)मन्दिरों और तीर्थ स्थानों में फैले भ्रष्टाचार, पाखण्ड की आलोचना
प्रेमा (1907)हिन्दुओं में विधवा-विवाह की समस्या का चित्रण
सेवा सदन (1918)वेश्या जीवन से सम्बद्ध समस्या का चित्रण
वरदान (1921)प्रेम एवं विवाह की समस्या का चिण
प्रेमाश्रम (1922)औपनिवेशक शासन में जमींदार एवं किसानों के सम्बन्ध का चित्रण
रंगभूमि 1925औद्योगीकरण के दोष, पूँजीवादियों की शोषण नीति, अंग्रेजों के अत्याचार एवं भारतीय शिक्षितों की चरित्र-हीनता का विश्लेषण व चित्रण
कायाकल्प (1926)पुनर्जन्म की धारणा पर समाज-सेवा, राजा के अत्याचार विलास एवं सच्चे प्रेम का चित्रण
निर्मला (1927)दहेज एवं अनमोल विवाह की समस्या का चित्रण
गबन (1931)मध्यवर्गीय जीवन की असंगति का यथार्थ मनोवैज्ञानिक चित्रण
कर्मभूमि (1933)हिन्दू-मुस्लिम एकता, अछूतोद्धार एवं दलित किसानों के उत्थान की कथा
गोदान 1936किसान जीवन की महागाथा एवं ऋण की समस्या का अंकन
मंगलसूत्र 1948अधूरा

प्रेमचन्द्र ने सन् 1929 ई. में ‘प्रेमा’ उपन्यास को संशोधित करके ‘प्रतिज्ञा’ शीर्षक से प्रकाशित करवाया।प्रेमचन्द्र ने ‘आदर्शोन्मुख यथार्थवादी’ उपन्यास लेखन की परम्परा का प्रवर्तन किया।विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ ने तीन उपन्यासों की रचना की-

उपन्यासवर्षविषय
माँ1929माँ की महिमा एवं आदर्श का प्रतिपादन
भिखारिणी1929अन्तर्जातीय विवाह की समस्या एवं प्रेम की त्रासदी का चित्रण
संघर्ष1945आर्थिक विषमता के कारण प्रेम की निष्फलता का चित्रण

शिवपूजन सहाय ने सन् 1926 ई. में ‘देहाती दुनिया’ शीर्षक से एक उपन्यास की रचना की।डॉ. गोपाल राय के अनुसार ‘देहाती दुनिया’ एक आंचलिक उपन्यास है।चंडी प्रसाद ‘हृदयेश’ ने भावपूर्ण आदर्शवादी शैली में ‘मनोरमा (1924) और ‘मंगल प्रभात’ (1926) उपन्यास की रचना की।पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र ने सर्वप्रथम हिन्दी उपन्यास में पत्रात्मक प्रविधि का प्रवर्तन किया।पत्रात्मक प्रविधि में प्रथम उपन्यास बेचन शर्मा ‘उग्र’ ने ‘चंद हसीनों के खतूत’ (1927) शीर्षक से लिखा।’विशाल भारत’ पत्रिका के सम्पादक बनारसीदास चतुर्वेदी ने बेचन शर्मा ‘उग्र’ के उपन्यासों को ‘घासलेटी साहित्य’ कहा था।बेचन शर्मा ‘उग्र’ ने निम्न उपन्यासों की रचना की है-

उपन्यासवर्षविषय
चंद हसीनों के खतूत1927हिन्दू-मुस्लिम के प्रेम एवं विवाह का चित्रण
दिल्ली का दलाल1927युवतियों का क्रय-विक्रय करने वाली संस्थाओं का पर्दाफाश
बुधुआ की बेटी1928अछूतोद्धार की समस्या (‘मनुष्यानंद’ नाम से रूपांतरण)
शराबी1930वेश्याओं और शराब घरों का नग्न यथार्थ चित्रण
सरकारी तुम्हारी आँखों में1937शासन तंत्र की अव्यवस्था एवं प्रजा की पीड़ा का चित्रण
चाकलेट1927
जी जी जी1937हिन्दू समाज की स्त्री की पीड़ा का चित्रण
फागुन के दिन चार1960
जुहू1963

प्रकृतिवादी उपन्यासों का जनक जोला को माना जाता है।हिन्दी में प्रकृतिवादी उपन्यासों के जनक पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ को स्वीकार किया जाता है।ऋषभचरण जैन प्रकृतिवादी शैली के उपन्यासकार हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ अग्रांकित हैं-

उपन्यासवर्षउपन्यासवर्ष
पैसे का साथी1928दिल्ली का कलंक1936
दिल्ली का व्यभिचार1928चम्पाकली1937
दिल्ली का व्यभिचार1928चम्पाकली1937
वेश्या पुत्र1929हिज हाइनेस1938
वेश्या पुत्र1929हिज हाइनेस1938
मास्टर साहब1927मयखाना1938
सत्याग्रह1930तीन इक्के1940
रहस्यमयी1931दुराचार के अड्डे1930

कुछ आलोचकों ने हिन्दी में प्रकृतिवादी या यथार्थवादी उपन्यास का जनक जयशंकर प्रसाद को माना है।प्रसाद के महत्वपूर्ण उपन्यास निम्न हैं-

कंकाल 1929तत्कालीन समाज का यथार्थ नग्न चित्रण
तितली 1934पूँजीपतियों द्वारा निम्नवर्ग का शोषण
इरावती 1936अपूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास

आचार्य चतुरसेन शास्त्री को कुछ औपन्यासिक कृतियों के लिए प्रकृतिवादी उपन्यासकार माना जाता है, जो निम्न हैं-

उपन्यासवर्षविषय
हृदय की परख1918विवाह पूर्व प्रेम एवं अवैध सन्तान की समस्या चित्रण
हृदय की प्यास1931
अमर अभिलाषा1933विधवाओं पर होने वाले अत्याचार का चित्रण
व्यभिचार1924प्रेम के अमर्यादित एवं अश्लील रूप का अंकन
आत्मदाह1937आजादी के लिए आन्दोलन एवं देश प्रेम का चित्रण

अनूपलाल मण्डल ने ‘निर्वासिता’ (1929), ‘समाज की वेदी पर’ (1931), ‘साकी’ (1932), ‘रुपरेखा’ (1934), ‘ज्योतिर्मयी’ (1934) उपन्यासों की रचना की।अनूपलाल ने ‘समाज की वेदी पर’ एवं ‘रुपरेखा’ उपन्यास की रचना पत्रात्मक प्रविधि पर की।अनूपलाल मण्डल के अन्य उपन्यास हैं- 1 मीमांसा (1937), 2. आवारों की दुनिया (1945), 3. दर्द की तस्वीरें (1945) और 4. बुझने न पाये।सियारामशरण गुप्त गाँधीवादी विचारधारा के उपन्यासकार हैं। इनकी प्रमुख रचना हैं-

उपन्यासवर्षविषय
गोद1932संदेह एवं अविश्वास के कारण स्त्री की समस्या एवं दर्द का चित्रण
अन्तिम आकांक्षा1934सामाजिक एवं धार्मिक विसंगति का चित्रण
नारी1937समकालीन हिन्दू स्त्री की असहायता एवं विवशता का चित्रण

प्रतापनारायण श्रीवास्तव भी गाँधीवादी (मानवतावादी) उपन्यासकार हैं। इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-

विदा 1927भारतीय एवं पाश्चात्य सभ्यता का समन्वय
विजय 1937बाल विधवा समस्या का चित्रण
विकास 1938उच्च वर्ग के विलासिता का चित्रण

राधिकारमण प्रसाद सिंह के महत्वपूर्ण उपन्यास हैं- 1. रामरहीम (1936), 2. पुरुष और नारी, 3. संस्कार (1942) और 4. चुम्बन और चाटा (1956)।प्रेमचंद्र युग के अन्य महत्वपूर्ण रचनाकार एवं रचनाएँ-

जी. पी. श्रीवास्तव-1. महाशय भड़ाम सिंह शर्मा (1919), 2. लतखोरीलाल (1931), 3 विलायती उल्लू (1932), 4. स्वामी चौखटानंद (1936), 5. प्राणनाथ (1925), 6. गंगा जमुनी (1927), 7. दिल की आग उर्फ दिल जले की आग (1932)।

मन्नन द्विवेदी ‘गजपुरी’- कल्याणी (1921)

मदारी लाल गुप्त- 1. गौरीशंकर (1923), 2. सखाराम (1924), 3. मानिक मंदिर (1926)।

गिरिजादत्त शुक्ल ‘गिरीश’- 1. सन्देह (1925), 2. प्रेम की पीड़ा (1930), 3. अरुणोदय (1930), 4. पाप की पहेली, 5. बाबू साहब (1932)।

प्रफुल्लचंद्र ओझा- 1. संन्यासिनी (1926), 2. पतझड़ (1930), 3. पाप और पुण्य (1930) , 4. जेलयात्रा (1931), 5. तलाक (1932)।

सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’- 1. अप्सरा (1931), 2. अलका (1933), 3. निरुपमा (1936), 4. प्रभावती (1936), 5. चोटी की पकड़, 6. काले कारनामे (1950)।

श्रीनाथ सिंह- 1. उलझन (1922), 2. क्षमा (1925), 3. एकाकिनी (1927), 4. प्रेम परीक्षा (1927), 5. जागरण (1937), 6. प्रजामंडल (1941), 7. एक और अनेक (1951), 8. अपह्रता (1952)।

भगवती प्रसाद वाजपेयी- 1. प्रेमपथ (1926), 2. अनाथ पत्नी (1928), 3. मुस्कान (1929), 4. प्रेम निर्वाह (1934), 5. पतिता की साधना (1936), 6. चलते-चलते (1951), 7. टूटते-बंधन (1963)।डायरी प्रविधि का हिन्दी में प्रवर्तन आदित्य प्रसन्नराय के उपन्यास ‘मुन्नी की डायरी’ से माना जाता है। इसका प्रकाशन सन् 1932 ई. में हुआ था।हिन्दी में सहयोगी उपन्यास लेखन की शुरुआत सन् 1927 ई. में प्रकाशित भगवती प्रसाद वायपेयी, वृन्दावनलाल वर्मा और शम्भू दयाल सक्सेना के उपन्यास ‘त्रिमूर्ति’ से माना जाता है।

हिन्दी उपन्यास का विकास

तृतीय उत्थान : प्रेमचन्दोत्तर युग

जैनेन्द्र कुमार को हिन्दी में मनोविश्लेषणवादी उपन्यास का जनक माना जाता है।डॉ. गोपाल राय के अनुसार, ”इलाचन्द्र जोशी को हिन्दी में मनोवैज्ञानिक उपन्यास का पुरस्कर्ता माना जा सकता है।”जैनेन्द्र कुमार ने निम्नलिखित उपन्यासों की रचना की है-

उपन्यासवर्षविषय
परख1929प्रेम का आदर्शीकरण
सुनीता1934श्रीकांत, सुनीता एवं हरिप्रसन्न के मनोभावों का विश्लेषण
त्याग पत्र1937स्त्री के विद्रोही व्यक्तित्व का चित्रण
कल्याणी1939विवाह के पश्चात की समस्या का चित्रण
सुखदा1952नायिका सुखदा के मनोभावों का विश्लेषण
विवर्त1953भुवनमोहिनी एवं जितेन की प्रेम कथा का चित्रण
व्यतीत1953
जयवर्द्धन1956व्यक्ति की निजता एवं शासन की सामाजिकता के द्वंद्व का चित्रण
मुक्तिबोध1965
अनन्तर1968
अनाम स्वामी1974मानव के धार्मिक रूढ़ियों से मुक्त होने का चित्रण
दशार्क1985विवाह विच्छेद एवं स्त्री जीवन की विडम्बना का चित्रण

जैनेन्द्र कुमार के उपन्यासों का मूल विषय काम-पीड़ा एवं अहं का समर्पण है।इलाचन्द्र जोशी मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार हैं। इनके प्रमुख उपन्यास निम्न है-

उपन्यासवर्षविषय
घृणामयी1929एक युवती के पश्चाताप का चित्रण (1950 में ‘लज्जा’ शीर्षक से)
संन्यासी1940नंद किशोर के अहंभाव का मनोविश्लेषण
पर्दे की रानी1942मानसिक विकृतियों के व्यक्तियों के चरित्र की मनोवैज्ञानिक व्याख्या
प्रेम और छाया1944पारसनाथ की मानसिक कुण्ठा का चित्रण
निर्वासित1946महीप और नीलिमा के प्रेम का चित्रण
मुक्तिपथ1948
सुबह के भूले1951
जहाज का पंक्षी1954ईमानदार एवं आदर्शवादी व्यक्ति के कष्टों का चित्रण
ऋतु चक्र1969आधुनिकता के नाम पर पनपती विसंगति का चित्रण
भूत का भविष्य1973
कवि की प्रेयसी1976

सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ एक प्रौढ़ मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार हैं।जैनेन्द्र ने सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन को ‘अज्ञेय’ नाम दिया था।अज्ञेय की प्रमुख औपन्यासिक कृतियाँ हैं-

उपन्यासवर्षविषय
शेखर : एक जीवनीभाग- एक (1940)
भाग- दो (1944)
नायक शेखर के कैशोर्य का विश्लेषण
शेखर के युवाकाल की मानसिक स्थिति का अंकन
नदी के द्वीप1951रेखा, भुवन एवं गौरा की प्रेम कथा
अपने अपने अजनबी1961मृत्यु से साक्षात्कार

अज्ञेय के अनुसार, ”शेखर की खोज अन्ततोगत्वा स्वतंत्रता की खोज है।”’शेखर : एक जीवनी’ पर रोम्या रोलां की पुस्तक ज्यों क्रिस्तोफ़’ का प्रभाव लेखक ने स्वीकार किया है।आलोचकों ने ‘शेखर : एक जीवनी’ की आलोचना ‘प्रकाशमान पुच्छल तारा’ कहकर की है।डॉ. देवराज ने निम्नलिखित मनोवैज्ञानिक उपन्यासों की रचना की है-

उपन्यासवर्षविषय
पथ की खोज1951प्रेम एवं विवाह के नैतिकता का प्रश्न
बाहर भीतर1954मध्यवर्गीय परिवार में स्त्री की यातनापूर्ण स्थिति का चित्रण
रोड़े और पत्थर1958मध्यवर्गीय लोगों के कुण्ठित जीवन की त्रासदी का चित्रण
आज की डायरी1960असफल वैवाहिक जीवन एवं प्रेम के त्रासद अन्त का चित्रण
मैं, वे और आप1969समकालीन जीवन मूल्यों के विघटन का चित्रण
दोहरी आग की लपट1973प्रेम और दाम्पत्य की समस्या का चित्रण
दूसरा सूत्र1978

विष्णु प्रभाकर मानवतावादी उपन्यासकार हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-

उपन्यासवर्षविषय
ढलती रात1951सन् 1920-36 तक की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति का चित्रण
तट के बंधन1955प्रेम व विवाह एवं नारी मुक्ति का चित्रण
स्वप्नमयी1996स्त्री के काल्पनिक, तर्कातीत एवं स्वप्नजीवी चरित्र का अंकन
कोई तो1980नैतिक रूढ़ियों एवं बलात्कार की शिकार स्त्रियों की समस्या
अर्धनारीश्वर1922स्त्रियों के बलात्कार एवं यातना का चित्रण
संकल्प1993परित्यक्ता स्त्री की मनोभावों का अंकन

उदयशंकर भट्ट एक मानवतावादी उपन्यासकार हैं। इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-

उपन्यासवर्षविषय
नये मोड़1954सुशिक्षित एवं आत्मनिर्भर नारी की विवशता का चित्रण
सागर लहरें और मनुष्य1956बम्बई के बारसोवा मछुआरों की जिन्दगी का चित्रण
लोक-परलोक1958ग्रामीण जीवन पर आधुनिक सभ्यता के प्रभाव का चित्रण
शेष-अशेष1960साधु-संन्यासियों के जीवन का यथार्थ चित्रण

भगवतीचरण वर्मा व्यक्तिवादी एवं नियतिवादी उपन्यासकार हैं। इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-

उपन्यासवर्षविषय
पतन1927अपराध एवं बलात्कार प्रधान ऐतिहासिक उपन्यास।
चित्रलेखा1934पाप एवं पुण्य के नैतिक प्रश्न का चित्रण।
तीन वर्ष1936प्रेम का विवाह में परिणति, इस समस्या का चित्रण।
टेढ़े मेढ़े रस्ते1946गाँधीवाद, साम्यवाद और आतंकवाद का टेढ़े मेढ़े रास्ते के रूप में चित्रण।
आखरी दाँव1950एक जुआरी की असफल प्रेम कथा।
अपने खिलौने1957दिल्ली के माडर्न सोसाइटी पर तीखा व्यंग्य।
भूले बिसरे चित्र1959तीन पीढ़ियों के जीवन मूल्य में परिवर्तन की कथा।
वह फिर नहीं आई1960आधुनिक जीवन की विषमता के बीच गहन जिजीविषा का चित्रण।
सामर्थ्य और सीमा1962प्रकृति के समक्ष मनुष्य की असहायता का चित्रण।
थके पाँव1963
रेखा1964नारी के गहन अंतर्द्वंन्द्व का चित्रण
सच्ची सीधी बात1968सन् 1938-48 तक के राष्ट्रवादी नेताओं की दृष्टि का मूल्यांकन
सबहिं नचावत राम गोसाई1970सन् 1919 से 1965 तक के इतिहास का चित्रण।
प्रश्न और मरीचिका1973व्यक्ति के मन में विघटित मानव मूल्य का प्रश्न एवं शासन की मरीचिका का चित्रण।

भगवतीचरण वर्मा कृत ‘चित्रलेखा’ पर फ्रेंच उपन्यासकार अनातोले के उपन्यास ‘थाया’ का प्रभाव हैं।उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ को मध्यवर्ग का चितेरा उपन्यासकार कहा जाता है। इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं।

1. सितारों के खेल (1940), 2. गिरती दीवारें (1947), 3. गर्म राख (1957), 4. बड़ी बड़ी आँखे (1955), 5. पत्थर अल पत्थर (1957), 6. शहर में घूमता आईना (1963), 7. एक रात का नरक (एक नन्हीं कंदील का एक अंश 1968), 8. एक नन्हीं कंदील (1969), 9. बाधों न नाँव इस ठाँव (1974), 10. निमिषा (1980), 11. पलटती धारा (1997)।उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ ने फ्रांसीसी उपन्यास ‘रोमाँ फ्लू’ से प्रेरणा लेकर ‘गिरती दीवारें’ को कई श्रृंखला में लिखा।सुमित्रानंदन पंत ने ‘बड़ी-बड़ी आँखें’ को एक गीति उपन्यास की संज्ञा दी।लक्ष्मीनारायण लाल व्यक्तिवादी उपन्यासकार हैं। इनकी कृतियाँ निम्नांकित हैं-

उपन्यासवर्षउपन्यासवर्ष
(1) धरती की आँखें 19511951(8) बड़के भैया1973
(2) बया का घोंसला और साँप1953(9) हरा समन्दर गोपी चंदर1974
(3) काले फूल का पौधा1955(10) वसंत की प्रतीक्षा1975
(4) रूपा जीवा1959(11) देवीना1976
(5) बड़ी चम्पा छोटी चम्पा1961(12) पुरुषोत्तम1983
(6) मन वृन्दावन1966(13) गली अनारकली1985
(7) प्रेम अपवित्र नदी1972(14) कनाटपैलेस1986

वृन्दावनलाल वर्मा को हिन्दी में ‘सर वाल्टर स्काट’ की उपाधि दी जाती है।वृन्दावनलाल वर्मा के प्रारम्भिक उपन्यास- 1. संगम (1927), 2. प्रत्यागत (1927), 3. लगन (1928), 4. कुन्डलीचक्र एवं 5. प्रेम की भेद- सामाजिक यथार्थ की अभिव्यक्ति करते हैं।वृन्दावनलाल वर्मा के ऐतिहासिक उपन्यास बुन्देलखण्ड के मुस्लिम शासन काल की पृष्ठभूमि पर आधारित हैं जो निम्नांकित हैं-

उपन्यासवर्षउपन्यासवर्ष
(1) गढ़कुण्डार1928(8) विराटा की पद्मनी1936
(2) मृगनयनी 19501950(9) टूटे काँटे1954
(3) अहिल्याबाई1955(10) भुवन विक्रम1957
(4) माधवजी सिंधिया1957(11) झाँसी की रानी1946
(5) कचनार1948(12) रामगढ़ की रानी1961
(6) महारानी दुर्गावती1964(13) कीचड़ और कमल1964
(7) सोती आग1966(14) देवगढ़ की मुस्कान1973

रांगेय राघेय की प्रथम रचना सन् 1946 में ‘घरौंदा’ शीर्षक से प्रकाशित हुई। यह परिसर (विश्वविद्यालय) जीवन पर लिखा हिन्दी का प्रथम उपन्यास है।रांगेय राघव ने तीन कोटि के उपन्यासों की रचना की है जो निम्न हैं-

1. जीवनीपरक उपन्यासवर्ष
देवकी का बेटा
यशोधरा जीत गई
लोई का ताना
रत्ना की बात
भारती का सपूत1954
लखिमा की आँखें1957
जब आवेगी काल घटा1958
धूनी का धुआँ1959
2. ग्रामीण एवं नगरीय यथार्थ के उपन्यासवर्ष
हुजू1951
सीधा सादा रास्ता1951
कब तक पुकारूँ1957
राई और पर्वत1958
छोटी सी बात1959
पथ का पाप1959
धरती मेरा घर1960
आखिरी आवाज1962
3. ऐतिहासिक उपन्यासवर्षविषयवस्तु
मुर्दो का टीला1948मोहनजोदड़ो सभ्यता की पृष्टभूमि पर आधारित
प्रतिदिन1950महाभारत युग के ब्राह्मण एवं क्षत्रिय के संघर्ष का चित्रण
चीवर1951हर्षकाल के ह्रासमान भारतीय सामंतवाद का चित्रण
अँधेरे के जुगुनू1953दासप्रथा को बचाये रखने के लिए कुलीन वर्ग के प्रयत्न का चित्रण
पक्षी और आकाश1957
राह न रूकी1958महावीर स्वामी एवं बुद्ध युग के जागरण की कथा

रांगेय राघव का ‘कब तक पुकारूँ’ उपन्यास जरायम पेशा करनट जाति के जीवन-यथार्थ से सम्बन्धित है।रांघेय राघव का ‘विषाद मठ’ (1946 ई.) बंगाल के अकाल पर आधारित है।अमृतलाल नागर के उपन्यासों को रामविलास शर्मा ने ‘हिन्दी के गैर मानक रूपों का पिटारा’ कहा है।अमृतलाल नागर के प्रसिद्ध उपन्यास निम्नलिखित हैं-

उपन्यासवर्षविषय
महाकाल1947बंगाल के अकाल की त्रासदी का चित्रण
सेठ बाँके लाल1955
बूँद और समुद्र1956लखनऊ के चौक के रूप में भारत की विभिन्न छवि का चित्रण
शतरंज के मोहरे1959अवध के नवाबों के ह्रासोन्मुख जीवन का चित्रण
सुहाग के नुपूर1960मध्यकालीन कुलवधुओं एवं नाहर वधुओं का चित्रण
अमृत और विष1966भारतीय गणतंत्र के 15 वर्षों का राजनैतिक एवं सामाजिक चित्रण
सात घूँघटवाला मुखड़ा1968मसरू बेगम के नारी-हृदय का चित्रण
एकदानैमिषारण्ये1972आचार्य भार्गव सोमाहुति, नैमिष आन्दोलन एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण का चित्रण
मानस का हंस1972तुलसीदास की जीवनी एवं व्यक्तित्व पर आधारित
नाच्यौं बहुत गोपाल1978भंगी समाज का इतिहास एवं उसके वर्तमान जीवन की नारकीयता का गहरी संवेदनात्मकता के साथ चित्रण
खंजन नयन1981सूरदास के जीवन और व्यक्तित्व पर आधारित
बिखरे तिनके1982
अग्निगर्भा1983
करवट1985लखनऊ के एक खत्री परिवार की तीन पीढ़ियों का चित्रण
पीढ़ियाँ1990‘करवट’ उपन्यास के अगले चरण के रूप में

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी एक ऐतिहासिक उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनके उपन्यास निम्नांकित हैं-

उपन्यासवर्षआधारविषयवस्तु
बाणभट्ट की आत्मकथा1946बाणभट्ट, निपुणिका निउनियाप्रेम का उदात्तीकरण एवं हर्ष-कालीन सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का चित्रण
चारुचन्द्र लेख1963राजा सातवाहन चन्द्रलेखा12वीं-13वीं शती के सांस्कृतिक एवं राजनीतिक स्थिति का चित्रण
पुनर्नवा1973लोरिकायन एवं मृच्छकटिकम्वर्ण व्यवस्था एवं नारी शोषण का चित्रण
अनामदास का पोथा1976छान्दोग्य एवं बृहदारण्यकऔपनिषदिक युग के परिवेश एवं जीवन पद्धति का चित्रण

नरेन्द्र कोहली हिन्दी उपन्यास के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं, इनकी निम्न रचनाएँ हैं-

उपन्यासवर्षविषयवस्तु
आतंक1972समकालीन जीवन में अपराधियों को संरक्षण देने वाली शासन तंत्र का चित्रण
साथ सहा गया दुःख1974मध्यवर्गीय शिक्षक नव दम्पति के ब्राह्म एवं आन्तरिक संघर्ष की कथा
‘अभ्युदय’ शीर्षक से (दो खण्ड में)
महामर
(आठ खण्ड में)
दीक्षा 1975
अवसर 1976
बंधन 1988
कर्म 1991
धर्म 1993
प्रच्छत्र 1997
प्रत्यक्ष 1998
निर्बन्ध 2000
अधिकार 1990
अन्तराल 1995
अभिज्ञान1981कृष्ण-सुदामा की मित्रता का नया सन्दर्भ
तोड़ों कारा तोड़ों
(दो भाग में)
1992
1993
विवेकानन्द की जीवनी पर आधारित
विवेकानन्द की जीवनी पर आधारित

नरेन्द्र कोहली ने ‘अभ्युदय’ में रामकथा को तथा ‘महासमर’ में महाभारत की कथा को नये सन्दर्भ में प्रस्तुत किया।अमरकांत एक प्रगतिशील उपन्यासकार हैं। इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-

उपन्यासवर्षविषय
सूखा पत्ता1959कथानायक कृष्ण की प्रेमकथा का चित्रण
आकाश पक्षी1967स्वाधीन भारतीय समाज के अन्तर्विरोधों का अंकन
काले उजले दिन1969विमाता के व्यवहार से एक व्यक्ति के विघटित चरित्र का अंकन
ग्राम सेविका1981
बीच की दीवार1981एक स्त्री की अनेक पुरुषों के प्रति आकर्षण की कथा
सुख जीवी1982
इन्हीं हथियारों से2003भारत छोड़ो आन्दोलन से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक के सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ का चित्रण

अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल को सन् 2011 का 45वाँ भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार संयुक्त रूप में प्राप्त हुआ।

हिन्दी उपन्यास का विकास

चतुर्थ-उत्थान : आधुनिकता बोध के उपन्यास

प्रभाकर माचवे प्रयोगवादी कवि उपन्यासकार हैं। इनके उपन्यास निम्न हैं-

उपन्यासवर्षउपन्यासवर्ष
(1) परन्तु1940(8) अनदेखी
(2) एकतारा1952(9) दर्द के पैबंद1974
(3) साँचा1956(10) द्यूत1976
(4) द्वाभा1957(11) किसलिए1975
(5) जो1964(12) आँख मेरी बाकी उनक1983
(6) किशोर1969(13) लापता1984
(7) तीस चालीस पचास1973

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना कवि उपन्यासकार हैं। इनके उपन्यास हैं-

उपन्यासवर्षविषयवस्तु
सोया हुआ जल1954एक प्रतीकात्मक उपन्यास
पागल कुत्तों का मसीहा1977कुत्तों के प्रतीक में रूढ़ जीवन मूल्यों का चित्रण
सूने चौखट1981बालक के स्वभाव का चित्रण

कमलेश्वर हिन्दी के प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण उपन्यासकार हैं। इनकी कृतियाँ हैं-

उपन्यासवर्षविषयवस्तु
एक सड़क सत्तावन गलियाँ1957लीला-नौटंकी करके जीविकोपार्जन करने वाले समाज का चित्रण
डाक बंगला1959मातृहीन कथानायिका ‘इरा’ की संघर्ष कथा का चित्रण
लौटे हुए मुसाफिर1961साम्प्रदायिक समस्या का चित्रण
समुद्र में खोया हुआ आदमी1967क्लर्क श्यामलाल, उनकी पुत्री तारा, पुत्र वीरन की कथा
काली आँधी1974स्त्री के राजनीतिक और पारिवारिक दायित्व एवं द्वंद्व का चित्रण
आगामी अतीत1976
तीसरा आदमी1976मध्यवर्गीय दम्पति के बीच तीसरे व्यक्ति के प्रवेश की कहानी
वही बात1980मध्यवर्गीय स्त्री की विसंगति एवं भटकाव का चित्रण
सुबह दोपहर शाम1982स्वतंत्रता संग्राम में क्रन्तिकारी दल की भूमिका का चित्रण
रेगिस्तान1988आदर्शों के टूटने का मार्मिक चित्रण
कितने पाकिस्तान2000

अभिमन्यु अनत मारीशस के हिन्दी उपन्यासकार हैं, इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-

उपन्यासवर्षउपन्यासवर्ष
(1) नदी बहती रही1970(8) शेफाली1979
(2) आन्दोलन1971(9) हड़ताल कब होगी1979
(3) एक बीघा प्यार1972(10) अपनी ही तलाश1982
(4) जम गया सूरज1973(11) अपनी-अपनी सीमा1983
(5) तपती दोपहरी1977(12) गाँधी जो बोले थे1984
(6) लाल पसीना1977(13) लहरों की बेटी1995
(7) कुहासे का दायरा(1978)(14) एक उम्मीद और

अभिमन्यु अनत प्रथम विदेशी हिन्दी लेखक हैं जो अपने देश के सम्बन्ध में हिन्दी भाषा में उपन्यास लिखते हैं। इन्हें मारीशस का प्रेमचंद्र कहा जाता है।श्रवण कुमार गोस्वामी ने निम्नांकित औपन्यासिक कृतियों की रचना की है-

उपन्यासवर्षविषयवस्तु
जंगल तंत्रम1979लोकतंत्र की असलियत का चित्रण
सेतु1981
भारत बनाम इण्डिया1983समकालीन भारत के गाँवों की पीड़ा का चित्रण
दर्पण झूठ न बोले1983समकालीन समाज में फैले आर्थिक-राजनीतिक भ्राष्टाचार का चित्रण
राहुकेतु1984एक ईमानदार व्यक्ति और भ्रष्ट समकालीन राजनीति का चित्रण
मेरे मरने के बाद1985हिन्दी लेखक की नियति का चित्रण
चक्रव्यूह1988विश्वविद्यालय परिसर की वास्तविकताओं का अंकन
आदमखोर1992
एक टुकड़ा सच1992
हस्तक्षेप2002
कहानी एक नेताजी की2005

मनोहरश्याम जोशी किस्सागो के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनके उपन्यास निम्नांकित है-

उपन्यासवर्षविषयवस्तु
करू करू स्वाहा1980बम्बई महानगर के फ़िल्म जगत के यथार्थ का चित्रण
कसप (क्या जाने?)1987एक प्रेम कथा
हरि या हरक्यूलीज की हैरानी1994कुमायूँ गढ़वाल क्षेत्र के जन-जीवन का चित्रण
टा-टा प्रोफेसर1995एक स्कूल शिक्षक के व्यंग्य चित्र का अंकन
हमजाद1996बाजारवादी प्रवृत्ति का चित्रण
क्याप (अजीब) कूर्मांचल के वाल्मीकि नगर की कहानी2001कूर्मांचल के वाल्मीकि नगर की कहानी
कौन हूँ मैं ?2006प्रसिद्ध भुवाल सन्याल के केस पर आधारित।

उपन्यास का उद्भव और विकास , upanyas hindi gaddha vidha , hindi sahitya ka itihas

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